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एक सौ घंटों बहन के साथ बलात्कार | ये मातायें अनब्याही हैं (4) — अमरेंद्र किशोर
खून से लबालब विषाद का समुद्र: अमरेंद्र किशोर | नक्सलवाद समस्या एवं समाधान
कन्याओं की अस्मिता सोखते हैं नक्सली  — लेख: अमरेंद्र किशोर | नक्सलवाद समस्या एवं समाधान
मादा देह मुर्गे के एक किलो गोश्त से भी सस्ती —  #ये_माताएं_अनब्याही —  अमरेंद्र किशोर

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ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
वह कलेक्टर था। वह प्रेम में थी। बिल उसने खुद चुकाया। | ग्रीन विलो – अनामिका अनु
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
संस्मरण : मैं महाकवि निराला जी से मुखातिब हुआ था - प्राण शर्मा Memoirs : Mai Mahakavi Nirala Se mukhatib Hua - Pran Sharma
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