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अंधेरे के सैलाब से रोशनी की ओर बढ़ती आत्मकथा - भावना मासीवाल
हास्य नाटिका- कहाँ हो तुम परिवर्तक ? - अशोक गुप्ता
कहानी: इस ज़माने में - प्रज्ञा | Hindi Kahani By Pragya
मेरे मन में अनेक विचार उठ-गिर रहे हैं - भारत भारद्वाज
महेन्द्र भीष्म अनछुए विषयों को छू रहे हैं - प्रो. राजेन्द्र कुमार
आलोचकों की दृष्टि वहां तक नहीं पहुंच पाती जहां तक रचनाकारों की दृष्टि पहुंचती है - अनंत विजय
कवितायेँ: स्पर्श के गुलमोहर - संगीता गुप्ता (hindi kavita sangrah)
कहानी: इनसानी नस्ल - नासिरा शर्मा
भाषांतर अनुभव

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ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani