'वर्तमान साहित्य' मार्च, 2015 - आवरण व अनुक्रमणिका

'वर्तमान साहित्य' मार्च, 2015 - आवरण व अनुक्रमणिका
आवरण के छायाकार भरत तिवारी

वर्तमान साहित्य

साहित्य, कला और सोच की पत्रिका

वर्ष 32 अंक 3  मार्च, 2015
सलाहकार संपादक:
रवीन्द्र कालिया
संपादक:
विभूति नारायण राय
कार्यकारी संपादक:
भारत भारद्वाज
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आलेख:
भक्ति: वर्चस्वी वर्गों की विचारधारा / विनोद शाही
उपन्यास अंश:
फांस (विदर्भ के किसानों की आत्महत्या पर)... / संजीव
स्मृति-शेष:
आर.के. लक्ष्मण की दुनिया... / हरिपाल त्यागी 
कहानी:
निर्भया नहीं मिली... / विवेक मिश्र 
संपन्न / प्रेमचंद सहजवाला
अभिशप्त वरदान /अरुणा सब्बरवाल
दिन भर का इंतजार /अर्नेस्ट हेमिंग्वे
कल बहुत दूर है / चीमामाण्डा 
कविता:
तेजी ईशा / तीन कविताएं
मजीद अहमद / नविता
दुर्गा प्रसाद गुप्त / माई ही तो घर थीं
उमेश चौहान के अवधी होली गीत
यात्रा-वृत्तांत:
सन्नाटे का संगीत / जया जादवानी
इतिहास:
गुम होती इबारत का हलफनामा: जो कहीं.../ सुधीर विद्यार्थी
मीडिया:
कैसे बचाई जाए मीडिया की साख / प्रांजल धर
नई किताब:
मणिकर्णिका-राजनैतिक यादें / प्रेमपाल शर्मा
सिनेमा:
सुंदर और असुंदर क्या है? / राहुल सिंह
रपट:
आॅक्सफोर्ड में विश्व मानववादी सम्मेलन / रणजीत 
स्तंभ:
तेरी मेरी सबकी बात / नमिता सिंह
सम्मति:
इधर-उधर से प्रतिक्रियाएं

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